Wednesday, 2 January 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कांग्रेस ने पूछे 10 सवाल

नरेंद्र मोदी के नए साल के पहले इंटरव्यू के तुरंत बाद कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस करके प्रधानमंत्री से 10 सवाल पूछे हैं.
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस करके प्रधानमंत्री मोदी के इंटरव्यू को 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' बताया.
उन्होंने कहा कि मोदी जी ने अपने 90 मिनट के इंटरव्यू में, 'मैं, मेरा, मुझे और मैंने' हज़ारों बार इस्तेमाल किया है.
कांग्रेस ने कहा कि 55 महीने सरकार चलाने के बाद पीएम मोदी के पास अब केवल सौ दिन बचे हैं और उनकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है.
बहरहाल कांग्रेस ने जो सवाल पूछे हैं, वो इस तरह से हैं-
1. 15-15 लाख रुपये आम लोगों के खाते में कब आएंगे. मोदी ने 2014 चुनाव प्रचार के दौरान इसका वादा किया था.
2. सौ दिन के अंदर देश भर में 80 लाख करोड़ काला धन आना था, उसमें एक रुपये भी 55 महीने में आया या नहीं.
3. प्रतिवर्ष दो करोड़ रोज़गार की दर से 55 महीने में नौ करोड़ से ज़्यादा रोज़गार पैदा होने चाहिए थे, क्या इतने समय में नौ लाख रोज़गार भी पैदा हो पाए.
4. किसानों को लागत पर 50 फ़ीसदी मुनाफ़ा देने का वादा किया था, क्या किसानों को लागत भी मिल पा रही है?
5. वादा तो व्यापार को सरल बनाने का था. लेकिन गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) लगाकर धंधा मंदा, व्यापार चौपट क्यों कर डाला.
6. नोटबंदी में काला धन वालों की ऐश, रातों रात सफ़ेद बनाया सारा कैश. देश की अर्थव्यवस्था को साढ़े तीन लाख करोड़ का नुक़सान हुआ. लाखों महिलाओं का बरसों पुराना स्त्रीधन लिया लूट. जनता लूटी, लाइन में 120 लोग मरे, इसका जवाब क्या है?
7. राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता एवं खिलवाड़ क्यों किया, जम्मू-कश्मीर में 55 महीने में 428 जवान और 278 नागरिक मारे गए, नक्सलवाद में 248 जवानों की जान गई, 378 नागरिक मारे गए. राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ क्यों.
8. भ्रष्टाचार सर चढ़कर बोल रहा है, आम जनमानस की ज़िंदगी हो या राफ़ेल का तीस हज़ार करोड़ का घोटाला. देश जानना चाहता है कि अगर कुछ ग़लत नहीं तो फिर ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) की जांच से परहेज़ क्यों है?
9. ये भी बता देते कि क्या गंगा मां साफ़ हो गई? सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड कहता है कि 39 में 38 जगह पर आज भी गंगा उतनी ही मैली है.
10. सौ स्मार्ट सिटीज में कितनी बनी 55 महीने में. शायद एक भी नहीं. स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया, स्टैंडअप इंडिया का क्या हुआ, जिसका नाम भी लेना छोड़ दिया आपने.
केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर जारी विरोध के बीच लाखों महिलाओं ने 'लैंगिक समानता के समर्थन' में 620 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई.
सबरीमला मंदिर में दस से पचास साल की महिलाओं के ना जाने की परंपरा थी. लेकिन सितंबर में भारत की सर्वोच्च अदालत ने महिलाओं पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया.
महिलाओं पर लगा ये प्रतिबंध तो हट गया लेकिन कई लोग फिर भी महिलाओं के सबरीमला मंदिर जाने का विरोध कर रहे हैं.
जिन महिलाओं ने मंदिर जाने की कोशिश की उनपर हमले भी हुए.
राज्य की वामपंथी गठबंधन सरकार ने ही इस मानव श्रृंखला 'महिलाओं की दीवार' का आयोजन किया है.
अधिकारियों ने वरिष्ठ पत्रकार इमरान कुरैशी को बताया कि इस श्रृंखला का हिस्सा बनने के लिए केरल के अलग-अलग हिस्सों से पचास लाख महिलाओं पहुंची थीं.
इन महिलाओं ने उत्तरी केरल के कसारागोड से लेकर दक्षिणी ज़िले तिरुवनंतपुरम तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर ये श्रृंखला बनाई.
अधिकारियों के मुताबिक़ ये प्रदर्शन ग़ैरबराबरी और उन दक्षिणपंथी समूहों के ख़िलाफ़ किया गया जो महिलाओं पर प्रतिबंध का समर्थन कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि महिलाओं पर लगा ये प्रतिबंध लैंगिक समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन करता है. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये प्रतिबंध हटाने का फ़ैसला सुनाया था.
लेकिन भारत की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने इस फ़ैसले को हिंदू मूल्यों पर हमला बताया.
ये मुद्दा अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव तक गर्म रहेगा. कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं. बीजेपी को हिंदू समर्थन वाली पार्टी कहा जाता है.
अक्तूबर से ही महिलाएं मंदिर में प्रवेश की कोशिशें कर चुकी हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं का एक वर्ग उनका रास्ता रोकता रहा है. इसमें भारतीय जनता पार्टी से लेकर कई संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के शामिल होने के आरोप भी लगे हैं.
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना कर चुके हैं. अक्तूबर में केरल के कन्नूर में ज़िला भाजपा कार्यालय के उद्घाटन के समय उन्होंने कहा था कि देश की अदालतों को व्यावहारिक होना चाहिए और वैसे ही फ़ैसले देने चाहिए, जिन्हें अमल में लाया जा सके.

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